Breaking News: अभी अभी Google पर लगा अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना

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ब्रसेल्स. यूरोपीय यूनियन (EU) ने अमेरिका की दिग्‍गज टेक कंपनी गूगल पर एंड्रॉयड स्‍मार्टफोन सिस्‍टम मामले में पोजिशन के गलत इस्तेमाल पर 4.34 बिलियन यूरो यानी करीब 34,308 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। 3 साल जांच के बाद ईयू ने गूगल को प्रतिस्पर्धा के नियम तोड़ने का दोषी पाया। जुर्माने की राशि 2017 में गूगल पर लगाए गए फाइन (16,000 करोड़ रुपए) से दोगुनी है। उस वक्त शॉपिंग कंपेरिजन सर्विस के लिए पेनल्टी लगाई थी। ईयू की कंपीटीशन कमिश्नर मारग्रेथ वेस्टेगर ने गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई को मंगलवार रात को ही फोन पर इस फैसले की जानकारी दे दी। गूगल ने कहा कि वो फैसले के खिलाफ अपील करेगा।

यह यूरोपीय यूनियन के ऐंटीट्रस्ट नियमों के हिसाब से गैरकानूनी है।’ उन्होंने कहा, ‘गूगल को 90 दिनों के भीतर इसे बंद कर देना चाहिए वरना उसे अल्फाबेट से होने वाली आमदनी का 5 प्रतिशत रोज जुर्माने के तौर पर भरना पड़ेगा।’

गूगल का कहना है कि वह इस जुर्माने के खिलाफ अपील करेगा। गूगल के प्रवक्ता अल वर्नी ने कहा, ‘ऐंड्रॉयड लोगों को ज्यादा विकल्प देने के लिए बनाया गया है। यह रैपिड इनोवेशन और अच्छी सुविधाओं की कीमत कम करने में मदद करता है।’ इससे पहले यूरोपीय यूनियन ने गूगल पर 2.4 अरब यूरो का जूर्माना लगाया था।

मोबाइल कंपनियों को पैसे देने का आरोप : यूरोपियन कंपीटीशन कमीशन का कहना है कि गूगल सर्च और कंपनी की दूसरी डिवाइस प्री-इन्स्टॉल करने वाली मोबाइल कंपनियों को गूगल पैसे देता है। उसने एंड्रॉयड मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम और ऐप्‍स पर एकाधिकार जमा रखा है। गूगल का सैमसंग जैसी बड़ी मोबाइल कंपनियों से करार है। इसके तहत इन कंपनियों के मोबाइल पर गूगल सर्च इंजन और गूगल क्रोम पहले से ही इंस्टॉल रहते हैं, जिससे दूसरी कंपनियों को मौका ही नहीं मिल पाता। कुछ ऐप्स डाउनलोड करने के लिए गूगल सर्च को डिफॉल्ट इंजन बनाने की शर्त भी थोपी जाती है। गूगल पर ये भी आरोप है कि वह मोबाइल कंपनियों को दूसरे ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले फोन बनाने से रोकती है। अप्रैल में यूरोपीय संघ ने इसकी शिकायत दर्ज की थी।  वेस्टेजर के इन फैसलों से उन्हें यूरोपीय यूनियन के देशों में काफी प्रशंसा मिली है लेकिन वॉशिंगटन में इसके खिलाफ गुस्सा है। यूरोप में इंटरनेट सर्च पर सिलिकॉन वैली के बढ़ते प्रभुत्व को लेकर ब्रसेल्स लगातार टारगेट करता रहा है।

गूगल एडसेंस की भी जांच : ईयू की कंपीटीशन कमिश्नर मारग्रेथ वेस्टेगर ने पिछले कई सालों से अमेरिकी कंपनी गूगल के खिलाफ सख्त रवैया अपना रखा है। इसके लिए यूरोप में उनकी तारीफ हुई, लेकिन अमेरिका में उनके खिलाफ गुस्सा है। गूगल के एडवर्टाइजिंग बिजनेस एडसेंस के खिलाफ भी यूरोपियन यूनियन जांच कर रहा है। यूरोप में 90% इंटरनेट सर्च मार्केट पर गूगल का कब्जा है। यूरोपियन संघ के ताजा फैसले को ट्रेड वॉर से भी जोड़ा जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यूरोपियन यूनियन समेत कई देशों से एल्युमिनियम और स्टील इंपोर्ट पर टैरिफ लगा चुके हैं।

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