BJP ने किसानों को बताया ‘शहरी माओवादी’, किसान देश का पेट भरते हैं, आपकी तरह अमीरों की जेब नहीं भरते

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मुंबई। मुंबई के आजाद मैदान में 35,000 किसान अपनी मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन संघ की शाखा से ट्रेनिंग लेकर आए मुख्यमंत्री इन्हें किसान मानने को तैयार ही नहीं हैं।

मुंबई में हो रहे किसान आन्दोलन पर BJP सांसद पूनम महाजन ने एक विवादित बयान दे दिया है। पूनम महाजन ने आन्दोलन में शामिल होने वाले किसानों को ‘शहरी माओवादी’ बताया है। पूनम महाजन ने पत्रकारों से कहा कि जो प्रदर्शनकारी हैं वो किसान नहीं हैं। पूनम ने कहा है कि महाराष्ट्र के आदिवासी शहरी माओवाद से प्रभावित हो चुके हैं। पूनम ने कहा है कि शहरी माओवाद किसानों को प्रभावित कर रहा है और किसानों पर माओवादियों का शिकंजा कसता जा रहा है। एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान पूनम ने कहा, ‘किसान बहुत बड़े स्तर पर शांति के साथ विरोध प्रदर्शन कर कर रहे हैं। उनके हाथों में कम्युनिस्ट झंडा है। ये सभी किसान सिर्फ नासिक से नहीं आए हैं, बल्कि पूरे महारष्ट्र से किसानों को इकठ्ठा किया गया है।’

माओवादी विचारधारा बनी है रोड़ा 

पूनम ने कहा कि, राज्य के मुख्यमंत्री इस मुद्दे पर किसानों के साथ मीटिंग कर रहे हैं। वे सभी मिल बैठ कर एक साथ इस समस्या का समाधान निकाल लेंगे। उन्होंने कहा, ‘यह दुख की बात है कि महाराष्ट्र के किसानों के ऊपर शहरी माओवाद का शिकंजा कसता जा रहा है और पुणे में इसका गढ़ मौजूद है। सरकार उनके लिए काफी कुछ करने का प्रयास कर रही है, लेकिन शहरी माओवादी विचारधारा के कारण ऐसा करना संभव नहीं हो पा रहा है। महाराष्ट्र के सभी किसान, आदिवासी और और उनकी समस्याओं का निराकरण करना हमारी और महाराष्ट्र सरकार की जिम्मेदारी है।’ बता दें इस से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कह चुके हैं कि ये किसान नहीं आदिवासी हैं। उन्होंने कहा था कि वो प्रदर्शनकारियों से बात कर रहे हैं और किसानों की प्रस्तावित मांगें पूरी की जाएंगी।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि मुंबई के आजाद मैदान में इकठ्ठा हुए 95% लोग आदिवासी है जो तकनीकी रूप से किसान नहीं है। किसान नेताओं का कहना है कि मुख्यमंत्री विरोध प्रदर्शन को कमजोर करने के लिए झूठा बयान दे रहे हैं।

अब सवाल उठता है कि देवेंद्र फडणवीस के लिए किसानों की परिभाषा क्या है? क्या जिनके पास ज्यादा जमीन होती हैं वो ही किसान होते हैं? क्या आदिवासी किसान नहीं होते? या फडणवीस इस बात को स्वीकार कर लिया है कि भाजपा ने आदिवासियों से उनकी पूरी जमीन छीन ली है इसलिए अब आदिवासी किसान हो ही नहीं सकते?

अगर पूनम महाजन और देवेंद्र फडणवीस की बात को मान भी लिया जाए तो क्या आंदोलन के जरिए जो सवाल उठाए जा रहे हैं वो गलत हैं?

CPIM ने पूनम महाजन के बयान कि निंदा करते हुए ट्वीट किया है कि ‘पूनम महाजन ये शहरी माओवादी नहीं हैं।

ये वो हैं जो देश का पेट भरते हैं।  लेकिन हां, उनके पास अहंकारी को नीचे लाने की शक्ति भी है। ये आपके और आपकी पार्टी जैसे कॉरपोरेट के ऐजेंट नहीं हैं।’

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