शुरू होने जा रहा जाट आंदोलन भाजपा को मिली धमकी कहा “UP में खाता भी नही खोलने देगे”

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वेस्ट यूपी के गूर्जर पहले से ही बीजेपी से नाराज चल रहे हैं। अब यूपी के चुनावों के ऐन मौके पर एक और समुदाय ने बीजेपी से हाथ खींचने का मन बना लिया है। जी हां, वेस्ट यूपी का जाट समुदाय बीजेपी से नाराज चल रहा है। आने वाले दिनों में जाट आंदोलन शुरू होने जा रहा है। जिसका असर यूपी विधानसभा चुनावों में देखने को मिलेगा। जाट आंदोलन के नेताओं ने दावा किया है यूपी चुनावों में वेस्ट यूपी में बीजेपी का खाता भी नहीं खुुलेगा। अगर ऐसा हुआ तो भाजपा का सूबे में सरकार बनाने का सपना एक बार फिर से सपना बनकर रह जाएगा।

जाट आंदोलन के नेता यशवीर मलिक ने बताया कि अक्टूबर में इसकी रूपरेखा बनाई जाएगी। आंदोलन संघर्ष समिति का राष्ट्रीय नेतृत्व मीटिंग कर डिसाइड करेगा कि आंदोलन कब करना है, लेकिन आंदोलन जल्द ही होगा। क्योंकि केंद्र सरकार को एक बार फिर से जगानेे के लिए आंदोलन की आवश्यकता आ पड़ी है। अभी हम पंजाब की ओर जा रहे हैं। मंगलवार को दिल्ली से एक ग्रुप पंजाब जा रहा है। वहां भी जाट 35 फीसदी के आसपास हैं। वहां अगर असर हुआ तो आने वाले समय में बाकी स्टेट में भी असर होने की पूरी संभावना है।

वेस्ट यूपी में नहीं खुल पाएगा

जाट आंदोलन का आने वाले चुनावों में वेस्ट यूपी में कितना असर पड़ेगा? इस बात का जवाब देते हुए यशवीर मलिक ने कहा कि यूपी के चुनावों में खासकर वेस्ट यूपी की 125 विधानसभाओं में जाट वोट बैंक एक डिसाइडिंग फैक्टर है। अगर वो पार्टी से छिटक जाते हैं तो बीजेपी वेस्ट यूपी में खाता भी नहीं खोल पाएगी। ऐसे में पार्टी वहीं जाकर खड़ी हो जाएगी, जहांं से शुरू हुई थी। उन्होंने कहा प्रदेश में सरकार बनानी है तो वेस्ट यूपी की 125 विधानसभा सीटों में से 60-70 सीटें जीतना बेहद जरूरी हैं। तभी प्रदेश में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच पाएगी।

कुछ ऐसे हैं समीकरण

वेस्ट यूपी में दलित और मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र हैं जो बीजेपी का वोट बैंक नहीं है। वेस्ट यूपी की 125 विधानसभा सीटों पर जाट हैं। जो पांच फीसदी से लेकर 35 फीसदी तक हैं। उन्होंने जाटों का समीकरण बताते हुए कहा कि मुरादाबाद मंडल की बात करें तो वहां पर पांच से सात फीसदी तक जाट वोटर्स हैं। वहां पर 45 फीसदी मुस्लिम हैं। वहां पर हिंदू मुस्लिम चुनाव होता है और जाट हिंदू एजेंडे से बाहर चला जाता है तो बीजेपी को एक भी सीट वहां से नहीं मिलेगी। वहीं बात आगरा मंडल की करें तो वहां पर मुस्लिम वोट इफेक्ट नहीं करता है, लेकिन वहां पर 25 से 30 फीसदी जाट हैं। अगर वहां जाट नाराज हो जाता है तो अपने आप में डिसाइडिंग फेक्टर काम करने लगता हैं। ऐसा ही हालात मेरठ मंडल और सहारनपुर मंडल का भी है।

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