राफेल सौदा: AAP ने रक्षामंत्री सीतारमण को भेजा कानूनी नोटिस….

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राफेल विमान सौदे पर फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के सनसनीखेज दावे के बाद भारत में सियासी घमासान जारी है। राफेल सौदे में ‘ऑफसेट साझेदार’ के संदर्भ में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के कथित बयान को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर विपक्ष लगातार हमला बोल रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल मामले की संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह ‘स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला’ है।

इस डील को लेकर जारी घमासान के बीच आम आदमी पार्टी(आप) के सांसद संजय सिंह ने राफेल सौदे को ‘महाघोटाला’ करार देते हुए मंगलवार(25 सितंबर) को इस सौदे को रद्द करने की मांग की और इसमें कथित अनियमितता को लेकर रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण को एक कानूनी नोटस भेजा।

समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक, संजय सिंह ने चेतावनी दी कि यदि निर्मला ने तीन दिनों के भीतर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो वह अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने इस सौदे में शामिल निजी भारतीय कंपनी को भी अलग करने की मांग की।

रक्षामंत्री को भेजे गए 11 पृष्ठों के नोटिस में कहा गया है, इस मामले (राफेल सौदा) में मूल्य निर्धारण और रणनीतिक साझेदार के रूप में बिल्कुल अनुभवहीन, अविश्वसनीय एक निजी कंपनी को रणनीतिक साझेदार के रूप में शामिल करने की आपकी गुप्त कार्रवाइयों के कारण मेरा मुवक्किल यह नोटिस जारी करने को मजबूर हुआ, क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदेह है।

नोटिस की प्रतियां केंद्रीय सतर्कता आयोग और प्रधानमंत्री को भी भेजी गई है। इसमें कहा गया है, रक्षा मंत्रालय का रुख और जारी किए गए बयान विरोधाभासी रहे हैं। संजय सिंह ने मीडिया से बातचीत में आरोप लगाया कि राफेल सौदा 36,000 करोड़ रुपये का एक महाघोटाला है।

दरअसल, फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने मीडियापार्ट को दिए इंटरव्यू में कहा था कि राफेल सौदे में रिलायंस का नाम खुद भारत सरकार ने सुझाया था। ओलांद का इंटरव्यू दुनिया के कई टीवी चैनलों पर प्रसारित होने के बाद राफेल सौदे को लेकर सरकार और विपक्ष दोनों की तरफ से प्रतिदिन आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। उनके इस बयान के बाद विपक्षी पार्टियों के आरोपों को बल मिला और उन्होंने सरकार पर हमलावर तेवर अख्तियार कर लिए है।

ओलांद का बयान सामने आने के बाद विपक्षी पार्टियों ने राफेल करार को लेकर मोदी सरकार पर हमले तेज कर दिए हैं। वे करार में भारी अनियमितता और रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं। उनका कहना है कि एयरोस्पेस क्षेत्र में रिलायंस डिफेंस लिमिटेड को कोई अनुभव नहीं है, लेकिन फिर भी सरकार ने अनुबंध उसे दे दिया।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 अप्रैल 2015 को पेरिस में फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति ओलांद के साथ वार्ता करने के बाद 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के करार की घोषणा की थी। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इस सौदे के माध्यम से रिलायंस डिफेंस को फायदा पहुंचा रही है।

रिलायंस डिफेंस ने इस सौदे की ऑफसेट जरुरतों को पूरा करने के लिए दसाल्ट एविएशन के साथ संयुक्त उपक्रम स्थापित किया है। विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि रिलायंस डिफेंस 10 अप्रैल 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से राफेल करार की घोषणा किए जाने से महज 12 दिन पहले बनाई गई। हालांकि, रिलायंस ग्रुप ने आरोपों को नकारा है।

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