मोदी की डिग्री की जांच करने वाले सूचना आयुक्त को HRD मिनिस्ट्री ने जांच से हटाया

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मुख्य सूचना आयुक्त आर. के. माथुर ने सूचना आयुक्त श्रीधर आचार्युलु से मानव संसाधन मंत्रालय (एचआरडी) से जुड़ी सूचनाओं का काम वापस ले लिया है जिसमें दिल्ली यूनिवर्सिटी के 1978 के बी.ए. सिलेबस के रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने के आदेश दिए थे। उसी साल नरेन्द्र मोदी ने बी.ए पास किया था।

 

मंगलवार शाम को जारी किए गए एक आदेश के मुताबिक, अब मानव संसाधन विकास मंत्रालय से संबंधित सभी शिकायतें और सुझाव सूचना आयुक्त मंजुला पराशर देखेंगी। बता दें कि मुख्य सूचना आयुक्त (सीआईसी) को यह विशेषाधिकार है कि वह किसी भी आयुक्त को कोई भी विषय सौंप सकता है।

दरअसल, यह आदेश 29 दिसंबर को लिए गए एक अन्य आदेश के कुछ दिन बाद आया जिसमें आचार्युलु को एचआरडी मिनिस्ट्री के चार्ज पर बरकरार रखा गया था। 21 दिसंबर को आचार्युलु ने दिल्ली विश्वविद्यालय को वर्ष 1978 में बी.ए. डिग्री पास करने वाले सभी विद्यार्थियों के रिकार्ड की पड़ताल करने का आदेश दिया था। गौरतलब है कि साल 1978 में ही दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बी.ए. डिग्री मिली थी। इसको लेकर कुछ दिनों पहले काफी विवाद हुआ था। कुछ लोगों का मानना है कि प्रधानमंत्री का डिग्री फेक है। इसको लेकर कुछ दिन पहले नरेंद्र मोदी ने अपने डिग्री की एक कॉपी सार्वजिनक की थी, जो कि कंप्यूटराइज थी, लेकिन इस पर सवाल उठाया गया था कि वर्ष 1978 में दिल्ली विश्वविश्वविद्यालय में जब कंप्यूटर नहीं था तो मोदी को कंप्यूटराइज कैसे मिला?

 

पिछले साल दिल्ली विश्वविद्यालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्नातक डिग्री के बारे में आरटीआई के तहत जानकारी देने से इंकार कर दिया था। उस समय कहा गया था कि यह छात्रों की व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित है, जिसका खुलासा करने से किसी भी सार्वजनिक गतिविधि या हित से कोई संबंध नहीं है। हालांकि आयोग ने कहा था कि छात्रों की शिक्षा से संबंधित मामला वर्तमान हो या पहले का सार्वजनिक हित की श्रेणी में आता है।

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